बालक और युवा (#8378)

स्तुति हो तेरी, हे स्वामी, मेरे ईश्वर! कृपापूर्वक वर दे कि यह शिशु तेरी स्नेहसिक्त दया और तेरे प्रेमपूर्ण मंगलविधान के स्तनों से आहार पाये और तेरे दिव्य वृक्ष के फल से पोषित हो। इसे अपने अतिरिक्त अन्य किसी के सार-सम्भाल में न छोड़, क्योंकि तूने अपनी सर्वोपरि इच्छा और शक्ति से इसका सृजन किया है और इसे अस्तित्व दिया है। तुझ सर्वशक्तिशाली, सर्वज्ञाता के सिवा अन्य कोई ईश्वर नहीं है।

-Bahá'u'lláh
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बालक और युवा (#14343)

महिमावंत है तू, हे मेरे प्रियतम, इस पर अपनी दिव्य सुरभि और अपने पावन वरदानों की सुगंध प्रवाहित कर। इसे अपने परम पावन नाम की छाया तले आश्रय की आकांक्षा करने योग्य बना, हे तू जो अपनी मुट्ठी में समस्त नामों और गुणों का साम्राज्य धारण किये हुए है! वस्तुतः तू जो चाहे करने में समर्थ है और तू निश्चय ही सामर्थ्‍यशाली, सदा क्षमाशील, अनुग्रहमय और कृपालु है।

-Bahá'u'lláh
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बालक और युवा (#8379)

हे ईश्वर! मेरा मार्गदर्शन कर, मेरी रक्षा कर, मुझे एक दीप्तिमान दीप और देदीप्यमान सितारा बना दे। तू शक्तिशाली एवं बलशाली है।

-`Abdu'l-Bahá
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बालक और युवा (#8383)

हे ईश्वर! मेरे स्वामी! मैं छोटी उम्र का बालक हूँ, अपनी दया के दुग्ध से मेरा पोषण कर, अपने प्रेम के वक्ष से मुझे प्रशिक्षण दे, अपने मार्गदर्शन की पाठशाला में मुझे शिक्षित कर और अपने आशीष की छत्रछाया में मेरा विकास कर। मुझे अंधकार से मुक्ति दे, मुझे एक दीप्त प्रकाशपुंज बना दे; मुझे उदासी से छुटकारा दिला; मुझे अपनी गुलाब वाटिका का एक पुष्प बना; मुझे अपनी पावन देहरी का एक सेवक बना और मुझे सदाचारियों की वृत्ति और स्वभाव प्रदान कर; मुझे मानव संसार के लिये सम्पदाओं का एक माध्यम बना और मेरे मस्तक को शाश्वत जीवन के मुकुट से सुशोभित कर। तू निश्चय ही शक्तिशाली, सामर्थ्‍यवान, सर्वद्रष्टा और सबका सुनने वाला है !

-`Abdu'l-Bahá
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बालक और युवा (#8382)

हे ईश्वर! इन बच्चों को शिक्षित कर। ये बच्चे तेरी फलों की बगिया के पौधे हैं, तेरे तृणभूमि के फूल हैं, तेरी वाटिका के गुलाब हैं। अपनी वर्षा की फुहारें उन पर पड़ने दे, सत्य के इस सूर्य को अपने स्नेह सहित इन पर जगमगाने दे। अपने समीर को उनमें ताजगी भरने दे, ताकि ये प्रशिक्षित हो सकें, विकास और वृद्धि कर सके, और परम सौन्दर्य में परिलक्षित हो सकें। तू दाता है। तू करुणामय है।

-`Abdu'l-Bahá
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बालक और युवा (#8381)

हे तू दयालु स्वामी! ये प्यारे बच्चे तेरी शक्ति की उँगलियों के हस्तकौशल हैं और तेरी महानता के अद्भुत चिन्ह हैं। हे ईश्वर! इन बच्चों की रक्षा कर, उनके शिक्षित होने में कृपापूर्वक उनकी सहायता कर और मानवता के जगत की सेवा करने के लिए उन्हें समर्थ बना। हे ईश्वर! ये बच्चे मोती हैं, इन्हें अपनी स्नेहमयी-कृपालुता के कवच में इनका पोषण करा।
तू उदार, सभी से प्रेम करने वाला है।

-`Abdu'l-Bahá
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बालक और युवा (#8380)

हे स्वामी, इस युवा को दीप्तिमान बना और इस अकिंचन प्राणी को अपनी उदारता प्रदान कर। इसे ज्ञान प्रदान कर, प्रत्येक प्रभात के साथ इसे शक्ति दे और अपने संरक्षण के आश्रय में इसे सुरक्षा दे ताकि यह भूल से मुक्त हो सके, स्वयं को तेरे धर्म की सेवा में समर्पित करे, पथभ्रष्टों का मार्गदर्शन कर सके, अभागो को राह दिखा सके, दासों को मुक्त कर सके और असावधानों को जगा सके। जिससे सभी तेरे स्मरण और स्तुति से धन्य हो सकें। तू शक्तिशाली और शक्तिसम्पन्न है।
 
*(”.....आरम्भ से ही बच्चों को ईश्वर का ज्ञान कराना चाहिये और ईश्वर का स्मरण करने के लिये उन्हें याद दिलाते रहना चाहिये। उनके अन्तर्मन में ईश्वर का प्रेम कुछ इस तरह व्याप्त हो जाने दें जैसे उनकी माँ का दूध उनकी नस-नस में घुल-मिल जाता है.....“)

-`Abdu'l-Bahá
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